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||प्यार की झलक ||

                     ||प्यार की झलक ||


 सारा जहाँ छोड़ तुझे अपना बनाने की कसम खाई है,

 जब से आँखों में तेरी प्यार की इक झलक पाई है |

 पूरी होकर भी जो अधूरी है,

 चाहकर भी कुछ नहीं कह पाया यही मेरी मज़बूरी है,

 तेरे ख्यालो से अपनी तकदीर बनाई है 

 जब से आँखों में तेरी प्यार की इक झलक पाई है |

 किसी गैर को बुला ना पाउँगा,

 चाहूंगा तो भी तुझको भुला ना पाउँगा,

 दिल में तस्वीर तेरी इसकदर समाई है 

 जब से आँखों में तेरी प्यार की इक झलक पाई है |


 मेरे हाथों की तू ही रेखा है,

 कोई और ख़यालो में आता नहीं जब से तुझको देखा है,

 दिल भी अपना नहीं जान भी पराई है,

 जब से आँखों में तेरी प्यार की इक झलक पाई है |

 नींद नहीं आती है सारी रात मुझको ख़्वाब तेरे फिर भी सजाने   लगता हूँ,

 याद कर तुझे मन ही मन मुस्कराने लगता हूँ,

 कली की तरह जब से "....." तू मुस्कराई है


 जब से आँखों में तेरी प्यार की इक झलक पाई है ||


         -सुधीर मेघवाल 

        05 जनवरी 2006

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