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|| इतना वो सताने लगे हैं ||

        || इतना वो सताने लगे हैं ||

   

   सितमगर इतना वो सताने लगे है,

   आंसुओ में भी नजर आने लगे है |

   तेरी हर आवाज़ पर दौड़े चले आते,

   मगर आप तो गैरो को बुलाने लगे है|

   नजरो से होती थीं जरूर बाते,

    पर नजरे भी अब हमसे चुराने लगे है |

  

    खाई थीं जिसने कसम ज़िन्दगी भर साथ निभाने की,

     वो ही हाथ किसी और को पकड़ाने लगे है |

     कांटो को उठाकर फूल जिसकी राँहो में बिछाये,

     वो ही राँहो में मेरी कांटे बिछाने लगे है|

     जिसको देखकर कभी ख़ुशी से झूम उठता था दिल,

     उसी की याद में अब आंसू बहाने लगे है||


     सुधीर मेघवाल 

    13 मई 2005

     

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