|| ये रात वही हैं || तेरी याद में गुजारी है जो ये रात वही है, तुम छोड़कर गईं थी जो ये हालात वही है | फिर कभी लबों पर आई नहीं, तुमने अधूरी छोड़ी थी जो ये बात वही है | आँखों के सिवा कहीं नमी नहीं है, रुकी नहीं कभी जो ये बरसात वही है | एक बार फिर वो सामने आए, समझा नहीं जिन्हे तुमने ये जज्बात वही है | बैठा हूँ कब से मैं चाँद के दीदार को, चाँद को पसंद आई ना कभी जो ये रात वही है | समझ आया ना खेल शय और मात का, "सुधीर" जीत रास आई ना जिसके बाद ये मात वही है || -सुधीर मेघवाल 03 मार्च 2005
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