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|| इतना वो सताने लगे हैं ||

        || इतना वो सताने लगे हैं ||        सितमगर इतना वो सताने लगे है,    आंसुओ में भी नजर आने लगे है |    तेरी हर आवाज़ पर दौड़े चले आते,    मगर आप तो गैरो को बुलाने लगे है|    नजरो से होती थीं जरूर बाते,     पर नजरे भी अब हमसे चुराने लगे है |        खाई थीं जिसने कसम ज़िन्दगी भर साथ निभाने की,      वो ही हाथ किसी और को पकड़ाने लगे है |      कांटो को उठाकर फूल जिसकी राँहो में बिछाये,      वो ही राँहो में मेरी कांटे बिछाने लगे है|      जिसको देखकर कभी ख़ुशी से झूम उठता था दिल,      उसी की याद में अब आंसू बहाने लगे है||      सुधीर मेघवाल      13 मई 2005      

एक चहेरा रोज ख्वाबों में आता है

         || एक चहेरा रोज ख्वाबों में आता है ||      एक चहेरा रोज ख्वाबों में आता है,      इक बार दे के दस्तक दिल पे सारी रात जगाता है|      महसूस होता है वो किसी परछाई की तरह,      हरपल साथ रहता है वो तन्हाई की तरह,      करीब आकर मेरे ग़मो की महफ़िल सजता है       एक चहेरा रोज ख्वाबों में आता है |     देखकर मुझे वो मुस्कराने लगता है,     शर्म से फिर वो नजरे झुकाने लगता है,     कर देता है जादू सा जब पलके गिराकर उठाता है      एक चहेरा रोज ख्वाबों में आता है |     याद उसकी दिल की धड़कन बढाती है पल पल,     एक बार दिखा के चहेरा हो जाता है ओझल,     चाँद जैसे एक बार दिख के बादलों में छिप जाता है      एक चहेरा रोज ख्वाबों में आता है |     उसी को ढूंढता है अब हर जगह मेरा मन,     वो चेहरा बन गया है मेरा जीवन,     आता है जो रोज खवाबों में देखना है कब ज़िन्दगी में आता...

|| तेरा अरमान ||

                     || तेरा अरमान ||   मेरी तन्हाईयाँ तेरा अरमान रखती हैं,   हरपल पास अपने तेरा एहसान रखती हैं,   मेरी तन्हाईयाँ तेरा अरमान रखती हैं|   फूलों में खुश्बू जैसे समाई हैं,   वैसे ही तेरे ख़यालो से महकी मेरी तन्हाई हैं,   महकता रहे ऐसे ही दामन मेरा ये अरमान रखती हैं,   मेरी तन्हाईयाँ तेरा अरमान रखती हैं|   तुमको सोचना, तुझे याद करना मेरा काम हैं,   लिखकर मिटाते रहते हैं जिसे अपनी हथेलियों पर वो तेरा    नाम हैं,   अपने दिल पे लिख लो नाम मेरा ये अरमान रखती है,   मेरी तन्हाईयाँ तेरा अरमान रखती हैं|   मेरी साँसों के गुलशन में उसकी मुस्कान से बहार हैं,   मेरे दिल की धड़कन उसका ही हैं,   ज़िन्दगी हो सिर्फ तेरी मुस्कान से ये अरमान रखती हैं,   मेरी तन्हाईयाँ तेरा अरमान रखती हैं|   हरपल पास अपने तेरा एहसान रखती हैं,  मेरी तन्हाईयाँ तेरा अरमान रखती हैं||    -सुधीर मेघवाल     29 अप्रैल 2006 

||प्यार की झलक ||

                     ||प्यार की झलक ||  सारा जहाँ छोड़ तुझे अपना बनाने की कसम खाई है,  जब से आँखों में तेरी प्यार की इक झलक पाई है |  पूरी होकर भी जो अधूरी है,  चाहकर भी कुछ नहीं कह पाया यही मेरी मज़बूरी है,  तेरे ख्यालो से अपनी तकदीर बनाई है   जब से आँखों में तेरी प्यार की इक झलक पाई है |  किसी गैर को बुला ना पाउँगा,  चाहूंगा तो भी तुझको भुला ना पाउँगा,  दिल में तस्वीर तेरी इसकदर समाई है   जब से आँखों में तेरी प्यार की इक झलक पाई है |  मेरे हाथों की तू ही रेखा है,  कोई और ख़यालो में आता नहीं जब से तुझको देखा है,  दिल भी अपना नहीं जान भी पराई है,  जब से आँखों में तेरी प्यार की इक झलक पाई है |  नींद नहीं आती है सारी रात मुझको ख़्वाब तेरे फिर भी सजाने   लगता हूँ,  याद कर तुझे मन ही मन मुस्कराने लगता हूँ,  कली की तरह जब से "....." तू मुस्कराई है  जब से आँखों में तेरी प्यार की इक झलक पाई है ||          -सुधी...

|| ये रात वही हैं ||

                      || ये रात वही हैं ||  तेरी याद में गुजारी है जो ये रात वही है,  तुम छोड़कर गईं थी जो ये हालात वही है |  फिर कभी लबों पर आई नहीं,  तुमने अधूरी छोड़ी थी जो ये बात वही है |  आँखों के सिवा कहीं नमी नहीं है,  रुकी नहीं कभी जो ये बरसात वही है |  एक बार फिर वो सामने आए,  समझा नहीं जिन्हे तुमने ये जज्बात वही है |  बैठा हूँ कब से मैं चाँद के दीदार को,  चाँद को पसंद आई ना कभी जो ये रात वही है |  समझ आया ना खेल शय और मात का,  "सुधीर" जीत रास आई ना जिसके बाद ये मात वही है ||           -सुधीर मेघवाल            03 मार्च 2005

||शामिल नाम हमारा कर ले ||

                 ||शामिल नाम हमारा कर ले ||  ये इक गम गवारा कर ले,  अपने दोस्तों में शामिल नाम हमारा कर ले|  किस तरह ये वक़त बीता है,  इश्क़ में कैसे कोई मर के जीता है,  जब अपना कोई किनारा कर ले   ये इक गम गवारा कर ले,  अपने दोस्तों में शामिल नाम हमारा कर ले|  फायदा क्या है ज़िन्दगी में मौत की पनाह का,  ये इश्क़ तो नाम है इक गुनाह का,  पिछले जन्म में किया था आ ये गुनाह दोबारा कर ले,  ये इक गम गवारा कर ले,  अपने दोस्तों में शामिल नाम हमारा कर ले|  रुलाती रहेंगी महफ़िले तन्हाइयों की,  डराती रहेंगी तस्वीरें परछाइयों की,  ज़िन्दगी में शामिल प्यार हमारा कर ले   ये इक गम गवारा कर ले,  अपने दोस्तों में शामिल नाम हमारा कर ले||     -सुधीर मेघवाल        12 जुलाई 2005

||अंधेरों से मोहब्बत हो गईं है||

                  ||अंधेरों से मोहब्बत हो गईं है|| शबनमी लबों पे शोख मुस्कान क़यामत सी हो गई है, डर लगता है उजालो से, अंधेरों से मोहब्बत सी हो गई है | चाहकर भी रुक नहीं पाते है कदम, तेरी ही चाहत रखता है दिल हरदम, इस दिल की मुझसे बगावत सी हो गई है  डर लगता है उजालो से, अंधेरों से मोहब्बत सी हो गई है | भुला देना चाहता हूँ तुझसे जुड़ीं हर याद, एक लम्हा चैन से जीया नहीं मैंने तुझसे मोहब्बत करने के बाद, हर पल बैचैन रहने की आदत सी हो गई है  डर लगता है उजालो से, अंधेरों से मोहब्बत सी हो गई है | अब तो ऐसा लगता है मैं जी ना पाउँगा तेरे बिन, जरा खुद से पूछ के देख क्या जी पाओगी तुम मेरे बिन, ये किस्मत से कैसी शरारत सी हो गई है  डर लगता है उजालो से, अंधेरों से मोहब्बत सी हो गई है | सागर के दो किनारे कभी मिलते नहीं ये जानता हूँ  मैं, हम दोनों है वो किनारे ये मानता हूँ मैं, दो किनारो के प्यार की शहादत सी हो गई है  डर लगता है उजालो से, अंधेरों से मोहब्बत सी हो गई है | कितने भी दीये जला लो मुझको रोशनी दे ना पाओगी तुम, जिधर से भी गुजरोग...