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हार

                              || हार || खाई हजार ठोकरें पर एक बार नहीं मानी, बहुत समझाया मैंने पर जिंदगी ने हार नहीं मानी। देख सके मेरी निगाहें इतना उजाला कहां से लाऊं , दे सके पनाह मेरे अरमानों को ऐसा रखवाला कहां से लाऊं, कभी बलखाती कटार,  कभी तलवार नहीं मानी, बहुत समझाया मैंने पर जिंदगी ने हार नहीं मानी। लहरें छोड़ सागर को किनारों के पास लौट आती, मेरी एक आवाज पर वह शायद वापस लौट आती, कभी चूड़े की खनक, कभी पायल की झंकार नहीं मानी, बहुत समझाया मैंने पर जिंदगी ने हार नहीं मानी। चाहकर भी भुला ना पाया आखिरी पैगाम तुम्हारा, बहुत चाहा ना लिखूं कलाई पर नाम तुम्हारा, क्या करूं पर खंजर की धार नहीं मानी, बहुत समझाया मैंने पर जिंदगी ने हार नहीं मानी। शतरंज जिंदगी की जीत कर भी हार के, बैठे हैं पतझड़ में देवता बहार के, सजाना जो चाहा गुलशन रंग बदलती बहार नहीं  मानी,  बहुत समझाया मैंने पर जिंदगी ने हार नहीं मानी || सुधीर मेघवाल  15 may 2006
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अंदाज़

                   ||अंदाज़|| निगाहों में हम जिसे बसा  लेते हैं।  रोता हो कितना भी हंसा लेते हैं। क्या मिलता है लोगों को फूलों से खुशबू चुराकर,  हम तो कांटों से अपना दामन सजा लेते हैं।  ना दीपक जलाते हैं और ना जुगनुओं से खेलते हैं,  उदासी के आलम में एक प्यार भरी धुन बजा लेते हैं।  हमें पसंद नहीं देखना पत्थर दिल की आंखों में भी आंसू,  लोग दूसरों के आंसुओं का मजा लेते हैं।  जिंदा है हम आज तक इसी अंदाज के कारण,  कि किनारों से खामोशियां, लहरों से सदा लेते है।  सुधीर मेघवाल 30 may 2005  

हो जाए रोशन दुनिया मेरी

      "||हो जाए रोशन दुनिया मेरी||"  याद में मेरी घर के सारे चिराग जला दो,  हो जाए रोशन दुनिया मेरी जो तुम मुस्कुरा दो।  कर दो आज वो जो मुमकिन नहीं  है,  शरमा कर खुदा को भी दीवाना बना दो।  चांद निकल आये दिन में भी, बिखराकर जुल्फें अपनी दिन को रात बना दो | याद में मेरी घर के सारे चिराग जला दो, हो जाये रोशन दुनिया मेरी जो तुम मुस्करा दो | कर दो इक इशारा नजर से , सागर को बहना सीखा दो | जल ना जाये जान तुम्हारी , जुल्फों से अपनी इक आशियाँ बना दो | याद में मेरी घर के सारे चिराग जला दो, हो जाये रोशन दुनिया मेरी जो तुम मुस्करा दो | मान जाये ना बुरा मेरी तन्हाइयां , लबों से अपने इक गीत ही गुनगुना दो | ना कटती है राते अब तारे गिन-गिन के  अपनी जुल्फों की छाया में मुझको सुला दो | याद में मेरी घर के सारे चिराग जला दो, हो जाये रोशन दुनिया मेरी जो तुम मुस्करा दो || सुधीर मेघवाल  28 जून 2004

|| इतना वो सताने लगे हैं ||

        || इतना वो सताने लगे हैं ||        सितमगर इतना वो सताने लगे है,    आंसुओ में भी नजर आने लगे है |    तेरी हर आवाज़ पर दौड़े चले आते,    मगर आप तो गैरो को बुलाने लगे है|    नजरो से होती थीं जरूर बाते,     पर नजरे भी अब हमसे चुराने लगे है |        खाई थीं जिसने कसम ज़िन्दगी भर साथ निभाने की,      वो ही हाथ किसी और को पकड़ाने लगे है |      कांटो को उठाकर फूल जिसकी राँहो में बिछाये,      वो ही राँहो में मेरी कांटे बिछाने लगे है|      जिसको देखकर कभी ख़ुशी से झूम उठता था दिल,      उसी की याद में अब आंसू बहाने लगे है||      सुधीर मेघवाल      13 मई 2005      

एक चहेरा रोज ख्वाबों में आता है

         || एक चहेरा रोज ख्वाबों में आता है ||      एक चहेरा रोज ख्वाबों में आता है,      इक बार दे के दस्तक दिल पे सारी रात जगाता है|      महसूस होता है वो किसी परछाई की तरह,      हरपल साथ रहता है वो तन्हाई की तरह,      करीब आकर मेरे ग़मो की महफ़िल सजता है       एक चहेरा रोज ख्वाबों में आता है |     देखकर मुझे वो मुस्कराने लगता है,     शर्म से फिर वो नजरे झुकाने लगता है,     कर देता है जादू सा जब पलके गिराकर उठाता है      एक चहेरा रोज ख्वाबों में आता है |     याद उसकी दिल की धड़कन बढाती है पल पल,     एक बार दिखा के चहेरा हो जाता है ओझल,     चाँद जैसे एक बार दिख के बादलों में छिप जाता है      एक चहेरा रोज ख्वाबों में आता है |     उसी को ढूंढता है अब हर जगह मेरा मन,     वो चेहरा बन गया है मेरा जीवन,     आता है जो रोज खवाबों में देखना है कब ज़िन्दगी में आता...

|| तेरा अरमान ||

                     || तेरा अरमान ||   मेरी तन्हाईयाँ तेरा अरमान रखती हैं,   हरपल पास अपने तेरा एहसान रखती हैं,   मेरी तन्हाईयाँ तेरा अरमान रखती हैं|   फूलों में खुश्बू जैसे समाई हैं,   वैसे ही तेरे ख़यालो से महकी मेरी तन्हाई हैं,   महकता रहे ऐसे ही दामन मेरा ये अरमान रखती हैं,   मेरी तन्हाईयाँ तेरा अरमान रखती हैं|   तुमको सोचना, तुझे याद करना मेरा काम हैं,   लिखकर मिटाते रहते हैं जिसे अपनी हथेलियों पर वो तेरा    नाम हैं,   अपने दिल पे लिख लो नाम मेरा ये अरमान रखती है,   मेरी तन्हाईयाँ तेरा अरमान रखती हैं|   मेरी साँसों के गुलशन में उसकी मुस्कान से बहार हैं,   मेरे दिल की धड़कन उसका ही हैं,   ज़िन्दगी हो सिर्फ तेरी मुस्कान से ये अरमान रखती हैं,   मेरी तन्हाईयाँ तेरा अरमान रखती हैं|   हरपल पास अपने तेरा एहसान रखती हैं,  मेरी तन्हाईयाँ तेरा अरमान रखती हैं||    -सुधीर मेघवाल     29 अप्रैल 2006 

||प्यार की झलक ||

                     ||प्यार की झलक ||  सारा जहाँ छोड़ तुझे अपना बनाने की कसम खाई है,  जब से आँखों में तेरी प्यार की इक झलक पाई है |  पूरी होकर भी जो अधूरी है,  चाहकर भी कुछ नहीं कह पाया यही मेरी मज़बूरी है,  तेरे ख्यालो से अपनी तकदीर बनाई है   जब से आँखों में तेरी प्यार की इक झलक पाई है |  किसी गैर को बुला ना पाउँगा,  चाहूंगा तो भी तुझको भुला ना पाउँगा,  दिल में तस्वीर तेरी इसकदर समाई है   जब से आँखों में तेरी प्यार की इक झलक पाई है |  मेरे हाथों की तू ही रेखा है,  कोई और ख़यालो में आता नहीं जब से तुझको देखा है,  दिल भी अपना नहीं जान भी पराई है,  जब से आँखों में तेरी प्यार की इक झलक पाई है |  नींद नहीं आती है सारी रात मुझको ख़्वाब तेरे फिर भी सजाने   लगता हूँ,  याद कर तुझे मन ही मन मुस्कराने लगता हूँ,  कली की तरह जब से "....." तू मुस्कराई है  जब से आँखों में तेरी प्यार की इक झलक पाई है ||          -सुधी...